Saturday, August 15, 2009

वन्दे मातरम!





आज स्वाधीनता दिवस है. मेरा आज का दिन विधान सभा समारोह की कवरेज और उसकी रेडियो-रिपोर्ट बनाने में बीतता रहा हैं. पूरी कवरेज टीम की पसीनाबहाऊ सरगर्मियों का बैकग्राउंड समेटे यह रिपोर्ट खासी थकाने वाली होती है. आज कई वर्षों बाद मेरी ड्यूटी कवरेज में नही लगाई गई है. यानी आज के दिन मैं फ़्री ! परिवारजन कई वर्षों बाद आज इस तरह खुश दिखे.स्वतंत्रता दिवस के दिन मेरा भी स्वतंत्र होना सबके लिए सुखद आश्चर्य है.

सुबह ऑफ़िस के ध्वजारोहण समारोह के बाद से समझ में नही आ रहा क्या करूँ. घरवालों के डर से यह कहने की हिम्मत नही है कि आज की छुट्टी बेरंग लग रही है. कैसे उन्हे बताऊँ कि आज के दिन की रेडियो रिपोर्ट मुझ जैसी साधारण ब्रॉड्कास्टर के लिए, मेरी तरफ़ से एक छोटी सी पुष्पाँजलि होती है भारत माँ के चरणों में ... पर कौन सुनेगा मेरी? हमेशा आप ही की ड्यूटी क्यों लग जाती है ऐसे कामों में? सरकारी नौकरी में ज़्यादा काम करने से तनख्वाह बढ् के नही मिल जाएगी. ..घर वालों की वही पुरानी दलीलें...पर फिर भी मन विचलित है.


एकाएक याद आ जाती है मई 2009 की 19 तारीख. ईरान की राजधानी तेहरान में आयोजित 10वें अंतर्राष्ट्रीय रेडियो फ़ेस्टिवल का अंतिम दिन. विश्व के 42 देशों से आए रेडियो कार्यक्रमों का कम्पटीशन जिसमें 121 फाइनल प्रविष्टियाँ है और जिसका रिज़ल्ट आज आउट होना हैं.एक वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व मेरे ज़िम्मे है. मैं बहुत नर्वस हूँ. पता नही क्या रिज़ल्ट होगा. अपने देश के लिए आज पूरी दुनिया के सामने सम्मान अर्जित कर पाऊँगी या खाली हाथ देश वापस लौटूँगी? मन कर रहा है किसी मन्दिर जाकर मनौती मान आऊँ, पर इस देश में आस पास कोई मन्दिर नही दीखता ..

शाम हो गई है.समारोह में भाग लेने के लिए मैं उस विराट हॉल में प्रवेश कर रही हूँ. दुनिया के 42 देशों के ध्वज कतार से लगे हैं. अपने तिरंगे के सामने मै ठिठक कर खडी हो जाती हूँ ,सबकी नज़र बचा कर, धीरे से तिरंगे को छू कर, भारत माँ से प्रार्थना करती हूँ " अगर आज भारत को शील्ड मिल जाती है तो लौटते में, मैं इसी तिरंगे के साथ फोटो खिचवाऊँगी."

भारत माँ ने मेरी प्रार्थना सुन ली है. मै शील्ड लेकर फोटो खिंचवा रही हूँ और भावुक स्वर में गा रही हूँ वन्दे मातरम!.


वन्दे मातरम! सुजलाम सुफलाम मलयज शीतलाम शस्य श्यामलाम मातरम! शु्भ्र ज्योत्सना पुलकित यामिनीम फुल्ल कुसुमितद्रुमदल शोभणीम. सुहासिनीम सुमधुर भाषणीम. सुखदाम् वरदाम् मातरम्. वन्दे मातरम!

21 comments:

Arvind Mishra said...

जैसी आपकी मन्नते /मनोकामनाएं भारत माता ने पूरी की -सभी की वैसी ही पूरी करें !
स्वाधेनता दिवस की बधायी !

vallabh said...

बधाई....
वन्दे मातरम

Mithilesh dubey said...

शानदार रचना है । स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई।

वन्दे मातरम

विनय ‘नज़र’ said...

vande maataram...

Dr. Mahesh Sinha said...

बधाई वन्दे मातरम्

गिरिजेश राव said...

वन्दे मातरम

इस देश को आप जैसे सफल मनतियों की आवश्यकता है। रोज मन्नतें मानिए। कौन जानता है कि किस के सर कौन सा ताज आ जाए?

आप का जज्बा दिल की गहराइयों में उतर गया।

sanjay vyas said...

चित्र देखकर एक गौरवमयी अनुभूति को साझा करने सा अहसास हुआ.बधाई.
आज के दिन बड़े केन्द्रों पर ड्यूटीरत स्टाफ परिश्रम को भी गौरव-भाव से दूसरे स्थान पर रखता है. और शायद हर देशवासी चाहे वो घर पर ही क्यों न हो, यही सोच रखता है.
आपका दिन जैसा आपने बताया आज बड़ा व्यस्त रहा करता है, इस बार आप घर पर ही रहीं पर आपका जज्बा अपने काम पर तैनात रहा. इस जज्बे को सलाम.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

आभार
वंदे मातरम ....!!!

दिगम्बर नासवा said...

Dil ko choone waala sansmaran aur bhaavna se otprot lekh padh kar bahoot achha laga..... "desh ke jhande ko choo kar bhi man mein mandir jaane ka sankalp pooraa ho gaya" ..... naman hai aapki desh prem ki bhaavna ko...

janta ki aawaz said...

भारत माता इसी तरह हम सब की भी मनोकामना पुरी करे .............

वंदे मातरम्......!!!!!!!

भूतनाथ said...

क्या हुआ जो मुहँ में घास है
अरे कम-से-कम देश तो आजाद है.....!!
क्या हुआ जो चोरों के सर पर ताज है
अरे कम-से-कम देश तो आजाद है.....!!
क्या हुआ जो गरीबों के हिस्से में कोढ़ ओर खाज है
अरे कम-से-कम देश तो आजाद है.....!!
क्या हुआ जो अब हमें देशद्रोहियों पर नाज है
अरे कम-से-कम देश तो आजाद है.....!!
क्या हुआ जो सोने के दामों में बिक रहा अनाज है
अरे कम-से-कम देश तो आजाद है.....!!
क्या हुआ जो आधे देश में आतंकवादियों का राज है
अरे कम-से-कम देश तो आजाद है.....!!
क्या जो कदम-कदम पे स्त्री की लुट रही लाज है
अरे कम-से-कम देश तो आजाद है.....!!
क्या हुआ जो हर आम आदमी हो रहा बर्बाद है
अरे कम-से-कम देश तो आजाद है.....!!
क्या हुआ जो हर शासन से सारी जनता नाराज है
अरे कम-से-कम देश तो आजाद है.....!!
क्या हुआ जो देश के अंजाम का बहुत बुरा आगाज है
अरे कम-से-कम देश तो आजाद है.....!!
इस लोकतंत्र में हर तरफ से आ रही गालियों की आवाज़ है
बस इसी तरह से मेरा यह देश आजाद है....!!!!

Pramod Kumar Kush 'tanha' said...

Lekhan prabhavi aur sunder ban padaa hai...badhaayee...

ओम आर्य said...

bahut hi khushi huee ki aapako puraskar mil gayi ........agar minnate sachche man se ki jaaye to jarur puri hoti hai .......badhaaee ho ....

Mrs. Asha Joglekar said...

Aapke blog par pehali bar aayee. saree posts padh lee. Aapki kawitaen sunder hain. Swadheenta diwas par aapko badhaee. Aapkee prarthana me dum hai Bharat ma ke liye bhee kijiye na .

Om said...
This comment has been removed by the author.
Om said...

अदभुत देशप्रेम...प्रेरक...!
विदेशी झंडों के बीच तिरंगा शान से लहरा रहा है...!
अपने मातृ-ऋण का बडा अंश चुकाने में सफल रहीं आप.
वन्दे मातरम!!!

rajyashree said...

yadi yeh tumhari keval vyaktigat upalabhdhi hoti to main tumhen badhai deti lekin is upalabhdhi se tumne DESH ka naam ujjwal kiya hai videsh me jakar TIRANGE ko gaurvanvit kiya hai isliye.....I SALUTE YOU! BANDE MATRAM!

प्रवीण जाखड़ said...

आपके बारे में जानकर अच्छा लगा। आपकी 121 प्रविष्ठियों में परिणाम का क्या रहा। आपने अभी तक नहीं लिखा। हमें इंतजार है। वैसे भी तिरंगा जहां नजर आ जाए, सर सम्मान से झुक जाता है। दूर देस में तो, उस एहसास को पाना बहुत ही अलग होता है। आभार आपसे रूबरू होने का अवसर आपने ही दिया। आप मेरे ब्लॉग तक आईं, शायद तभी संभव हुआ। परिणाम जरूर बताइएगा। पूरी उम्मीद और विश्वास है ईश्वर ने आपकी कामना स्वीकार जरूर की होगी।

प्रवीण जाखड़ said...

आपको ढेर सारी बधाईयां। बहुत-बहुत शुभकामनाएं भी।

Common Hindu said...

बधाई वन्दे मातरम्

शिवम् मिश्रा said...

बहुत बहुत बधाई |
वन्दे मातरम् |

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