Saturday, May 07, 2011

माँ का खत

(मदर्स-डे पर माँ के लिए)



कल रात

इक खत को खोलते ही

बिजली चली गई.

माँ वो खत तुम्हारा ही है ना ?

अँधेरे में मैंने अक्षरों कों सहला कर देखा था

बड़े मुलायम थे हर्फ.

उन मुलायम हर्फों में बसी हैं

छोटे-छोटे रोजमर्रा के कामों को

ठीक से कर लेने की

वो ढेर सारी हिदायतें

जो तुम हर रोज दिया करती थी मुझे ऐसे

जैसे कि पहली बार बोल रही हो.

वो जूस के ग्लास

जो हर घंटे रख जाती थी तुम मेरी स्टडी-टेबल पर

परीक्षा के दिनों में

बिना भूले,

वो ढेर सारे कलफ लगे सूट और साडियाँ

जो तुम खुद धोकर रख जाती थी मेरी अलमारी में

हर रोज,बिना थके

क्यों कि तुम्हे मालूम था कि मुझे कॉटन कपड़े पसंद हैं,

वो शहद से मीठी तुम्हारी आवाज़,

वो हर पल दुआ देती तुम्हारी जुबां,

मुझसे जुदा होने पर बेहद नम

तुम्हारी वो दो आँखें,

हाँ माँ!

ये सब कुछ बसता है

तुम्हारे खत के उन मुलायम हर्फों में

जो मैंने अभी तक पढ़ा नहीं हैं

जो मैंने अभी केवल छुआ है.

12 comments:

रश्मि प्रभा... said...

हाँ माँ!

ये सब कुछ बसता है

तुम्हारे खत के उन मुलायम हर्फों में

जो मैंने अभी तक पढ़ा नहीं हैं

जो मैंने अभी केवल छुआ है.
tumko padhna yaani pyaar ko padhna

प्रवीण पाण्डेय said...

वो कोमल भाव अभी तक अनछुये हैं।

सदा said...

तुम्हारे खत के उन मुलायम हर्फों में
जो मैंने अभी तक पढ़ा नहीं हैं
जो मैंने अभी केवल छुआ है.

बेहद नाजुक से अहसास है इन शब्‍दों में ...आभार ।

Kajal Kumar said...

वाह, नितांत मर्म को सहलाती एक सुंदर कविता

संजय भास्कर said...

मदर्स डे पर उम्दा प्रस्तुती! बधाई!

राज भाटिय़ा said...

हाँ माँ!

ये सब कुछ बसता है

तुम्हारे खत के उन मुलायम हर्फों में

जो मैंने अभी तक पढ़ा नहीं हैं

जो मैंने अभी केवल छुआ है.
बहुत सुंदर प्रस्तुति, धन्यवाद

JHAROKHA said...

meenu ji
sach likha hai aapne .
maato bina kahe hi hamare dil ki baat ko badi aasaani se samajh jaati hai ,jaane kaise .har jimmedariyan bachcho ke liye maa hans kar badi kushlata ke saath uthaleti hain .aakhir maa jo thahri .unse jyaada bachcho ki muk bhashha ko bhala aur koun jaan sakata hai .
isiliye to maako bhagvaan ka darja diya gaya hai .
modhers day ke awsar par maa ko shat -shat naman
poonam

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत ही अच्छा लिखा है आपने.
मदर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं!

सादर

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

हाँ माँ!

ये सब कुछ बसता है

तुम्हारे खत के उन मुलायम हर्फों में

जो मैंने अभी तक पढ़ा नहीं हैं

जो मैंने अभी केवल छुआ है.

बहुत सुंदर संवेदनशील भाव मीनूजी...... मन को छू गयी आपकी रचना

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सामयिक कविता, शुभकामनायें!

चैतन्य शर्मा said...

सुंदर कविता ......... हैप्पी मदर्स डे

Vivek Jain said...

बहुत सुंदर
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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