Friday, October 22, 2010

शक




शक-
एक ऐसी कीटनाशक दवा,

जिसके प्रयोग से-

कीटों के साथ-साथ
फसल भी
समूल नष्ट .

13 comments:

शिवम् मिश्रा said...

सत्य वचन !

alka sarwat said...

अच्छा
नया शोध

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

शक : मुफ्त का कीटनाशक

निर्मला कपिला said...

गागर मे सागर। शुभकामनायें।

यश(वन्त) said...

Chhoti kintu sargarbhit kavita.

प्रतिभा सक्सेना said...

मीनू जी ,
अच्छा कहा है आपने
पर
फ़सल ज़हरीली भी कह सकते हैं .

amar jeet said...

सही कहा आपने शक ने तो कई घरो को बर्बाद किया है और इसका इलाज तो हकीम लुकमान के भी पास नहीं था !

हिमांशु । Himanshu said...

गज़ब । छोटा पर प्रभावी ।

Arvind Mishra said...

सही कहती हैं मीनू जी इसलिए बी टी काटन दस्तक दे रहा है !

उस्ताद जी said...

1/10

कविता अपने कथ्य में अधूरी है. एक ही पहलू दिखा रही है. शक तो मानव जीवन का आधार है. उन्नति का बीज है. मानव मस्तिष्क अगर शक्की न होता तो आज भी हम आदम युग में जी रहे होते.

यश(वन्त) said...

दीपावली की शुभ कामनाएं

मेरे ब्लॉग पर-कैसी दीवाली मनाएंगे?

अल्पना वर्मा said...

बहुत सही लिखा है ...वैसे भी शक का इलाज तो दुनिया में है ही नहीं ..
दिवाली की बहुत बहुत शुभकामनाएं .

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

अरे वाह, ये तो विज्ञान कविता भी हो गयी। बधाई स्‍वीकारें, विज्ञान कविता की भी और दीपावली की भी।

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