Monday, September 27, 2010

कुत्ता




उसने मुझे कुत्ता कहा
सबके सामने
चिल्ला कर
बीच सड़क पर.

मेरी वफ़ादारी की घोषणा
पूरी दुनिया के सामने
करना चाहता होगा...

17 comments:

Majaal said...

जाने कैसी ग्रह स्तिथि रही होगी,
जब आईं थी आप,
कौन इस तरह का,
नजरिया पाता होगा ..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

क्या सकारात्मक सोच है ..बहुत खूब

Arvind Mishra said...

क्यूट सा कुत्ता क्यूट सी कविता

Meenu Khare said...

@अरविन्द जी

जी क्यूट सा कमेन्ट भी!धन्यवाद्.

पी.सी.गोदियाल said...

सटीक बात कही, कमसे कम कुत्ता तो बफादारी का पर्याय है वरना तो यहाँ ...

mukti said...

सच में घटनाओं और अन्य चीज़ों को देखने का आपका अंदाज़ निराला होता है.

डॉ महेश सिन्हा said...

इंसान बड़ी अजीब चीज है । वफादार जन्तु के नाम को भी गाली बना देता है !!

शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

Dr. Amarjeet Kaunke said...

bahut pyari kavita ke liye vadhaai

शरद कोकास said...

क्या बात है ।

Dr.R.Ramkumar said...

oho mera priya patra!

उसने मुझे कुत्ता कहा सबके सामने चिल्ला कर बीच सड़क पर.
मेरी वफ़ादारी की घोषणा पूरी दुनिया के सामने करना चाहता होगा...

please come at my blog--

mein bhi kuchh aisa hi kyal ka hoon...
khoob ghuzaregi jo mil baithainge deevane dooooo..

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब ... नज़रिया है एक ये भी ....

M VERMA said...

यह नज़रिय भी अच्छा है

usha rai said...

बहुत सही !!

JHAROKHA said...

meenu ji bahut dino baad aap mere blog par aai achha laga.

itni chhoti si kavita se kitni badi baat kah gai aap.
kammaal hai.
poonam

हिमांशु । Himanshu said...

हर बार प्रविष्टियां यूं ही नया देती हैं ।
सूक्ति-परक ढंग लुभाता है ।
आभार ।

अनवारुल हसन [AIR - FM RAINBOW 100.7 Lko] said...

ज़बरदस्त अभिव्यक्ति है... कुत्ते की एक आदत हमारे अन्दर भी है... जहाँ पर भी बैठतें हैं पहले साफ़ कर लेते हैं...हाँ वफ़ादारी का अभी तक हमें कोई तमगा नहीं मिला.

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