Sunday, January 17, 2010

अवधी दस्तरख्वान के लज़्ज़तदार पकवान







नवाबों का शहर लखनऊ जहाँ एक ओर अपनी तहज़ीब, गंगा-जमुनी संस्कृति और अदब के लिए प्रसिद्ध है वहीं दूसरी ओर यह संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प की बेजोड़ कलाओं के लिए भी जाना जाता है परंतु यहाँ की पाक कला भी ऐसी है कि खाने वाला बस उंगलियाँ चाटता रह जाए. अवध क्षेत्र की अपनी एक अलग खास नवाबी खानपान शैली है।

अगर आप लखनऊ आ रहे हैं तो लज़्ज़तदार व्यंजनों की एक लम्बी फ़ेहरिस्त आपके इंतज़ार में है जनाब. खाने का मीनू हाज़िर है ----कबाब, पुलाव, कोरमा, अकबरी जलेबी, खुरासानी खिचड़ी, दही के कोफ्ते , तरह की बिरयानीयां, नाहरी कुल्चे, शीरमाल, ज़र्दा, रुमाली रोटी और वर्की परांठा ,काकोरी कबाब, गलावटी कबाब, पतीली कबाब, बोटी कबाब, घुटवां कबाब और शामी कबाब, 'दमपुख़्त', सीख-कबाब और रूमाली रोटी का भी जवाब नहीं है। चकरा गए न? बताइए क्या खाएँगे आप?

मुगलकाल में अवध प्रांत अपनी समृद्धि के लिए विख्यात था। यहां के नवाब वाजिद अली शाह अपने शाही अंदाज और शानो-शौकत के लिए मशहूर थे। उन्हें लजीज खाने का बेहद शौक था। शाही रसोई में उनके खानसामे तरह-तरह के मुगलई लजीज पकवान बनाया करते थे और वहां ये पारंपरिक पकवान आज भी बेहद पसंद किए जाते हैं। गरम मसालों की खुशबू से भरपूर लज्जतदार अवधी व्यंजन आज पूरी दुनिया में मशहूर है।

नवाबी दौर में लज़ीज़ वयंजनों की अवधी पाक शैली अपने उरूज़ पर थी. पाक कला के माहिर अवध के बावर्ची और रकाबदारों ने मसालों के अतिविशिष्ट प्रयोग से अवध की खान पान परम्परा को अद्वितीय लज़्ज़त बख्शी और इसे कला की ऊँचाइयों तक पहुँचाया.

अवध के बावर्चीखाने ने जन्म दिया पाक कला की दम पद्धति को जिसमें व्यंजन कोयले की धीमी आँच पर पकाए जाते थे. पकाते समय भाप पतीली से बाहर न निकले इसके लिए सने हुए आटे की लोई को पतीली के ढक्कन के किनारों पर चिपका दिया जाता था. लखनऊ की बिरिआनी का खास स्वाद दम शैली से बिरयानी बनाने के कारण आता है और यही इसे हैदराबादी बिरयानी से अलग भी करता है. अवधी खाने की विशेषता मसालों और अन्य सामग्रियों के एक खास संतुलन से उत्पन्न स्वाद से जानी जाती थी और आज भी यह परम्परा जीवित है.

आइए खाने की शुरुआत शोरबे से करते हैं.माँसाहारियों को परोसा जाएगा “लखनवी यखनी शोरवा ” तो शाकाहारी स्वाद लेगे ‘दाल शोरवा’ का.

इसके बाद बारी है केसर लगा कर रोस्ट की गई ‘झींगा मेहरुन्निसाँ’और मुर्ग की खास प्रिपरेशन ‘टँगरी-मलिहाबादी’ की.


दम पुख्त एक लखनवी व्यंजन पकाने की विधि है। मूलतः इसके द्वारा मांसाहारी व्यंजन पकाये जाते हैं। 'दमपुख़्त' का कायदा है कि गोश्त को मसालों के साथ 4-5 घंटे तक हल्की आँच पर दम दिया जाता है (सारे मसालो जैसे तले हुए प्याज, हरी मिर्च, अदरख-लहसुन और खड़े मसालों को एक साथ पीस कर बरतन में गोश्त के साथ ढक दिया जाता है और ढक्कन के किनारों को गीले आटे से सील कर उसकी भाप (दम) में पकने दिया जाता है)। अगर लकड़ी के कोयले पर इसे पकाया जाए तो इसका असली ज़ायका पता चलता है, पकने के बाद इसे सूखे मेवे, धनिया-पुदीना से सजा रूमाली रोटियों के साथ पेश किया जाता है।

अवध का एक प्रसिध व्यंजन नहारी-कुल्चे है. वास्तव मे नहारी एक सामिष व्यंजन है जिसमें हड्डियों को विशिष्ट मसालों के साथ उबाल कर मसालेदार रसे में मिला कर गर्मागरम परोसा जाता है.इसी तरह कोरमा भी अवधी दस्तरख्वान का एक खास आकर्षण होता है.

मीठे व्यंजंनों में शीर क़ोरमा बहुत लोकप्रिय है जिसमें ग़ाढे दूध में मेवे और खोया पड़्ता है. डबलरोटी के टुकडों को तल कर केसर मिले दूध से बनाए गए शाही टुकडे मीठा खाने वालों की पहली पसन्द होती है तो जब लखनऊ की सिवइय़ाँ जब केसर की खुशबू और कटे हुए पिस्ते के साथ परोसी जाती हैं तो आदमी के मुँह से बेसाख्ता यही निकल जाता है क्या कहने लखनवी व्यंजनों के.

ऐसा नही है कि अवधी दस्तरख्वान पर शाकाहारी लोगों के लिए कुछ है ही नहीं.यहाँ पर आपको मिलेंगे कटहल, केले और पपीते के खास कबाब भी.पनीर को कोयले की आँच पर सेक कर मसालों के साथ बना “तोहफ़ा-ए-नूर्” केसर मिले “दही के कोफ़्ते” ,पनीर में खास तरह की चटनी भर कर बनाए गए कोफ्ते “पनीर-ए-हज़रतमहल”और शाकाहारी “गुलनार बिरयानी” आपको लखनवी स्वाद कभी भूलने नही देगी. लखनऊ की चाट देश की बेहतरीन चाट में से एक है तो मलाई की गिलौरी और मलाईमक्खन का स्वाद आप कभी भूल नहीं पाएँगे। और खाने के अंत में विश्व-प्रसिद्ध लखनऊ के पान जिनका कोई सानी नहीं है।

22 comments:

Arvind Mishra said...

लखनवी खाने का मीनू.....मीनू जी आपके मीनू के अगले आयटम का बेकरारी से इंतज़ार है और यह भी कि अबकी लखनऊ आये तो बिना इस मीनू से कुछ खाए आपका पीछा नहीं छोड़ने वाले, मीनू जी ....ख़बरदार भी कर दे रहे हैं !
अब आगे भी चर्चा होगी जब आपने खाना खजाना शुरू कर ही दिया है तो ......

डॉ महेश सिन्हा said...

इतवार की शाम आपने तो पूरा दस्तरख्वान सजा दिया .
मुह में पानी ही पानी

डॉ. मनोज मिश्र said...

वाह,आनंद आ गया.

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी जानकारी परोसी है आपने।

Meenu Khare said...

@अरविन्द जी ज़रूर आइए. आपका स्वागत है.
बेहतरीन लज़्ज़तदार लखनवी व्यंजन आपकी प्रतीक्षा में रहेंगे.

pragya pandey said...

waah meenuji .. khaane kaa poora mazaa aa gaya ... bahut lazeez tareeka hai yah lalchwaane ka

डॉ महेश सिन्हा said...

आमंत्रण सिर्फ अरविंद जी को ?
तारीफ तो हमने भी की थी !

RAJ SINH said...

ये हुयी न बात !

' शाने अवध '

Meenu Khare said...

@महेश सिन्हा जी

अरे नहीं डॉ. साहब आप सभी के लिए अवधी दस्तरख्वान का निमंत्रण है.

@प्रज्ञा जी आप तो लखनऊ की ही हैं फिर ललचाने की क्या बात? जब कहें हम लोग साथ चल सकते हैं दावत खाने.
-----
मीनू खरे

डॉ महेश सिन्हा said...

धन्यवाद मीनू जी

sangeeta swarup said...

मीनू जी,

आपने तो केवल बातों से ही खुश कर दिया . अवध के दस्तरखान को बहुत अच्छे से सजाया है....बधाई

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

वाह जी !
मैं तो अवधी भाषा में ब्लॉग भी लिखता हूँ ..
यह सब जान कर अच्छा लगा , और भी पता करूँगा
फिर क्या पता एक - पोस्ट जैसा ही बन जाय कभी ,अवधी में ही अवधी खानों पर ..
हम तो ठहरे ठेठ शाकाहारी , पर क्या हुआ दूसरों के स्वाद की
प्रतीति भी कम आह्लादकारी नहीं होती ..
बेहद 'लजीज' पोस्ट ...
याद आने लगा जायसी ने अपने 'पद्मावत' में व्यंजनों की क्या जबरदस्त
लिस्ट बनाई है ...
............... आभार ,,,

हरकीरत ' हीर' said...

कमाल है मीनू जी आप आल राउंडर हैं .....साहित्य से लेकर लज्ज़तदार पकवान तक .....???

पर हम तो शाकाहरी हैं मीनू जी ....खैर चित्र देख कर अच्छा लगा .....!!

दिगम्बर नासवा said...

अच्छी जानकारी दी है लख़नौऊ खाने की .... मुँह में पानी आ गया .........

हिमांशु । Himanshu said...

वाह ! हम भी ललच रहे हैं !

Meenu Khare said...

@हरकीरत जी और अमरेन्द्र जी अवधी दस्तरख्वान पर शाकाहारी व्यंजन भी बहुतायत से मिलते हैं. कुछ के नाम पोस्ट में भी दिए गए हैं. आप लखनऊ आएँ तो शाकाहारी व्यंजन की ही दावत दूँगी आपको.

रचना दीक्षित said...

वाह मीनू जी वाह! हम तो ख्वाबों में ही कबाब पकाने और खाने लगे. वैसे हमारे हिस्से में तो केवल आखिर पैरा ही आया. ये अच्छी बात नहीं है

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

जी धन्यवाद ...
जरूर लखनऊ आऊंगा और दावत का लुत्फ़ उठाऊंगा .. आभार ,,,

सुशीला पुरी said...

लाजवाब !!! मीनू जी आपने लखनवी लज़ीज़ मीनू दिखा कर ही तृप्त कर दिया .........वाकई हमारे शहर का जवाब नही . आपकी कलम यूँ ही लज़ीज़ बनी रहे इसी शुभकामनाओं के साथ ----

sanjay vyas said...

अमरेन्द्र नाथ जी वाली लखनवी थाली हमारी भी पसंद रहेगी:)

श्याम कोरी 'उदय' said...

....खूब ललचाया.... देख कर ही....!!!!

Anonymous said...

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