Wednesday, December 23, 2009

क्या पंकज सुबीर जी मदद करेंगे मेरी ?






शायद पढने वालों को इस पोस्ट का शीर्षक अजीब लगे पर सच यही है कि मुश्किल की इस घड़ी में मुझे पंकज सुबीर जी की मदद की दरकार है और मदद मिलने का पूरा भरोसा भी है.

बात दरअसल यह है कि आजकल मैं राष्ट्रीय एकता पर आधारित एक रेडियो डॉक्यूमेंटरी के निर्माण कार्य में लगी हुई हूँ जिसका शीर्षक है "हर धड़कन वतन के लिए." आज के समय में जब हर तरफ़ धार्मिक वैमनस्यता फैली हुई है और तुच्छ निजी स्वार्थ देश हित से बड़े लगने लगे हैं, जब धार्मिक कट्टरता का ज़हर देश की एकता और अखण्डता के लिए खतरा बनता जा रहा है,आरोप-प्रत्यारोपों के बीच जब सहिष्णुता एक मज़ाक सी लगने लगी है,जब संकीर्णता इतनी बढ़्ती जा रही है कि देश का सम्मान और देश की छवि भी दाँव पर लगने लगी है ऐसे में पूर्वांचल के कुछ मदरसे राष्ट्रवादी शिक्षा के दीपक से धार्मिक कलुषता के इस अन्धेरे को दूर भगाने का महान कार्य कर रहे हैं. इन मदरसों में मुस्लिम बच्चों के साथ हिन्दू बच्चे भी शिक्षा ग्रहण करते हैं. यहाँ अरबी,उर्दू के साथ सँस्कृत और हिन्दी भी पढाई जाती है. एक ओर क़ुरआन की आयतें तो दूसरी ओर सरस्वती वन्दना और गायत्री मंत्र भी पढाए जाते हैं.यही नहीं यहाँ पर अँग्रेज़ी, कम्प्यूटर और विज्ञान विषयों की शिक्षा भी दी जाती है.यह पूछने पर कि इस सबका उद्देश्य क्या है, जवाब मिलता है कि जब हिन्दुस्तान में जन्म लिया है तो यहाँ की हर चीज़ हमारी अपनी है और इस नाते हर धर्म और सँस्कृति को जानना और इज़्ज़त देना हमारा धर्म और कर्तव्य है.कुछ लोगों ने कहा हम भारत माँ के लाल हैं और अपनी माँ की इज़्ज़त करना तो हमारा फर्ज़ है. लोगों ने यहाँ तक कहा कि "हमारी हर धड़कन वतन के लिए है." उनकी इस बात से मैं इतना प्रभावित हुई कि मैने डॉक्यूमेंटरी का शीर्षक ही रख दिया "हर धड़कन वतन के लिए ."

लखनऊ से तीन सौ किमी दूर इन इंटीरियर विलेजेज़ में जाकर रिकार्डिंग का काम पूरा हो चुका है और फिलहाल वॉर फ़ुटिंग पर एडिटिंग चल रही है. कार्यक्रम सबमिट करने की अंतिम तारीख 28 दिसम्बर है.अब बात आती है उस बिन्दु की जहाँ मैं मुश्किल महसूस कर रही हूँ. अपने इस कार्यक्रम के क्लामेक्स बिन्दु पर मैं एक ग़ज़ल/नज़्म/शेर को संगीतबद्ध करके जोड़ना चाहती हूँ जिसमें मिसरा आए "हर धड़कन वतन के लिए." मुझे ऐसा कोई शेर फ़िलहाल ढूँढने से भी नही मिल पा रहा है.मैं काफ़ी परेशान थी ऐसे में मुझे याद आई पंकज सुबीर जी की जो कि प्रख्यात ऑनलाइन ग़ज़ल गुरू हैं और ब्लॉग जगत का लगभग हर अगला शायर उनका शिष्य है. मुझे लगा कि इस टीम से यदि मैं आग्रह करूँ तो मेरा काम यक़ीनन बहुत आसान हो जाएगा. अरे भई जहाँ पर गौतम राजर्षि, कंचन, श्यामल सुमन जैसे योग्य नामों की सूची शिष्य लिस्ट में हो वहाँ एक अच्छी ग़ज़ल/नज़्म् का जुगाड़ शॉर्ट नोटिस पर हो जाना कोई बड़ी बात तो नही है! यही सोच कर मैने यह पोस्ट लिखी है. इसे एक ओपन रिक्वेस्ट माना जा सकता है.जो लोग भी इस विषय पर लिख कर मेरी सहायता करना चाहें वे टिप्पणी के रूप में इसे भेज सकते हैं. बस इतना याद रहे कि अंतिम तिथि 28 दिसम्बर है.

पंकज जी देश के प्रति सम्मान के इस जज़्बे को लाखों लोगों तक पहुँचाने में आप और आपके शिष्यगण क्या मेरी मदद करेंगे? पंकज जी के नाम लिखी गई मेरी यह रिक्वेस्ट पोस्ट पंकज सुबीर जी के अलावा उन सभी मित्रों के लिए भी है जो ग़ज़ल/नज़्म् लिखने में रूचि रखते हैं. हाँ इतना विश्वास रखिए कि सर्वोत्तम ग़ज़ल को आकर्षक रूप से संगीतबद्ध करवाने की ज़िम्मेदारी मेरी है.


"हर धड़कन वतन के लिए" मिसरे पर आपकी ग़ज़लो और नज़्मों के इंतज़ार में,


मीनू खरे

23 comments:

महफूज़ अली said...

दी..... नमस्ते..... मैं भी ट्राय करता हूँ.... इस नेक काम के लिए लिखने के लिए.....

डॉ महेश सिन्हा said...

धड़कन वतन की हमसे है
चाहत वतन की हमसे है

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Pankaj ji, Zarur Madad karenge, aisa ham aasha karte hain.

सुलभ सतरंगी said...

आपने जिस गुरु और उनके शिष्यों को याद किया है. उनके लिए यह काम आसान ही है.

आपके नोटिस में समय सीमा खल रही है, वरना मेरे जैसा नवोदित भी कोशिश कर सकता है.

शुक्रिया

सुलभ

कंचन सिंह चौहान said...

Guru Ji shayad zarur madad karenge aap ki...!

aur veer ji ko apne manpasnda misare par kaam mil jayega :)

shubh kamanae.n

काजल कुमार Kajal Kumar said...

शुभकामनाएं.

गौतम राजरिशी said...

गुरुदेव के पास तो खजाना है, मैम! ये गुहार उन तक पहुँचाता हूँ।

पूर्वांचल के इन मदरसों के बारे में जानकर हार्दिक खुशी हुई। एक किरण फूटी तो है चलो....

दिगम्बर नासवा said...

मीनू जी ......... गुरुदेव की लेखनी से आपको ज़रूर ग़ज़ल के हीरे मोती मिलेंगे ........ हाँ अगर ये शेर आपको ठीक लगें तो मैं अपने आप को धन्य समझूंगा ...........

हर धड़कन वतन के लिए
यह जीवन वतन के लिए

इस धरती से जो पाया है
सब अर्पण वतन के लिए

मुक्त धरा हो मुक्त पवन
मुक्त गगन वतन के लिए

रग रग से फिर गूँजे अपने
जन गन मन वतन के लिए

भाषा या हो धर्म अलग पर
एक हो मन वतन के लिए

माँ मुझको भी टीका कर दो
यह तन मन वतन के लिए

निर्मला कपिला said...

मीनू जी आपने बहुत सही आदमी का चुनाव किया है चो बहुत सुह्रदय और देशभक्त इन्सान हैं । वो जरूर मदद करेंगे। बाकी सब उनके शिष्य भी लिख कर पहले उन को ही भेजेंगे। आप बहुत ही अच्छा काम कर रही हैं बधाई और शुभकामनायें

विनोद कुमार पांडेय said...

निश्चित रूप से आपको ग़ज़ल मिलेंगे पंकज जी से भी वैसे नासवा जी ने भी बहुत बढ़िया प्रस्तुति दी है..

Udan Tashtari said...

कोशिश कर ईमेल करते हैं.

Meenu Khare said...

@सुबीर जी फोन पर आपने ग़ज़ल 26 तारीख तक भेज देने का वायदा किया है. धन्यवाद, बहुत आभार.

@गौतम जी आपके गुरु जी से मेरी बात हो चुकी है, वे लिख रहे हैं पर यदि आप भी
इस हेतु कुछ लिख सकें तो हर्ष होगा. आपकी लेखन प्रतिभा की मैं सदा से क़ायल
रही हूँ. एक मर्मस्पर्शी नज़्म यदि देश के एक सैनिक की तरफ़ से हो जाए तो क्या
कहने. आशा है निराश नही करेंगे.

@नासवा जी आपकी रचना बहुत अच्छी लगी.आखिरी बन्द तो और भी सुन्दर है. धन्यवाद.

@महफ़ूज़ और समीर जी मैं आपकी ग़ज़ल का वेट कर रही हूँ. समीर जी ग़ज़ल ईमेल न करके टिप्पणी के रूप में लिखेगे तो ज़्यादा अच्छा लगेगा क्यों इसे सब लोग पढ़ सकेगे.

@ सुलभ आप भी ज़रूर लिखें, कई बार नवोदित लेखक भी श्रेष्ठ लिखते हैं.

@कंचन जी सिर्फ़ टिप्पणी से काम नही चलेगा ग़ज़ल भी लिखनी है.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Are, abhi tak Pankaj ji nahee aaye?

--------
2009 के श्रेष्ठ ब्लागर्स सम्मान!
अंग्रेज़ी का तिलिस्म तोड़ने की माया।

Meenu Khare said...

ज़ाकिर जी, पंकज जी ने मेल से जवाब दिया है और फोन से बताया है कि वो
26 तक ग़ज़ल दे देंगे. मैने अपनी उपरोक्त टिप्पणी में इसे लिखा भी है.

anjana said...

मीनू जी आप का यह काम बहुत प्रशंसनीय है।शुभकामनायें।वैसे नासवा जी की रचना भी अच्छी है।

सुलभ सतरंगी said...

मैंने ईमेल कर दिया है..... एक गीत रूप यहाँ है...

है जीवन वतन के लिए
हर धड़कन वतन के लिए ..

आवाज़ हम उठाये वतन के लिए
खून अपना बहायें वतन के लिए
दुश्मन को सबक सिखायें वतन के लिए
हमारा तन अर्पण वतन के लिए
हर धड़कन वतन के लिए..

तरक्की की राह में हम चलते जायें
हमारी कोशिश है नफरतों को मिटायें
हर कदम पर दिया प्रेम का जलायें
हम जीये हमवतन के लिए
हर धड़कन वतन के लिए..

वतन के वास्ते जीयें जायें हम
कार्य दुष्कर सारे किये जायें हम
बाधाओं से कभी न घबरायें हम
हमारा समर्पण वतन के लिए
हर धड़कन वतन के लिए..

है जीवन वतन के लिए
हर धड़कन वतन के लिए ..

गिरीश पंकज said...

हर धड़कन वतन के लिए
हम जिएंगे अमन के लिए
देश मेरा सलामत रहे...
हम मरें इस सपन के लिए
हम है इन्सां नहीं है पशु
जीते है जो कि धन के लिए
हमको जीना है मरना यहाँ
अपने सुन्दर चमन के लिए
कांटे राहों से हटते सदा
बढ़ने वाले चरन के लिए
रोशनी को बचाएँगे हम
हर किसी अंजुमन के लिए

पंकज सुबीर said...

मीनू जी दरअसल में कुछ बहुत व्यस्तताएं हो गईं बच्चों की छुट्टीयों के कारण । फिर भी समय निकाल कर लिख रहा हूं । हर धड़कन वतन के लिये में एक मात्रा कम हो रही है सो मैंने उसमें एक 'है' लगा दिया है यदि आप 'है' को हटाना चाहें तो उस स्थिति में आपको धड़कन का 'न' कुछ लम्बा खींच कर पढ़ना होगा । ये गीत दो अंतरों का है जिनमें वही बात है जो अपने चाही थी । ग़ज़ल में चूंकि मात्राओं की बंदिश होती है उसलिये मैंने गीत लिखना ही उचित समझा। आपने 28 की सुबह की डेड लाइन दी थी सो भेज रहा हूं ।

आपका ही सुबीर

बुलबुल हैं हम जान हमारी है अपने गुलशन के लिये

देखो सीना चीर हमारा हर धड़कन है वतन के लिये



भारत की माटी को अपने शीश पे हमने लगाया है

लेके तिरंगा शान से हमने वंदे मातरम गाया है

जब भी पड़ी ज़रूरत तो हम आगे बढ़ के लुटा देंगें

खून का इक इक कतरा अपने जाने से प्यालरे चमन के लिये

हर धड़कन है वतन के लिये, हर धड़कन है वतन के लिये



पैदा हुए यहीं पर इसकी ख़ाक में ही मिल जाएंगे

मज़हब ज़ात हो कुछ भी बस हिन्दु स्तागनी कहलाएंगे

जन्नबत भी गर मिले तो हंस के ठुकरा देंगे हम उसको

काश्मीजर से कन्याे कुमारी तक फैले आंगन के लिये

हर धड़कन है वतन के लिये, हर धड़कन है वतन के लिये

अनवारुल हसन [VOICE PRODUCTION] said...

31 Dec के production में व्यस्त रहा इस लिए देर से आप के ब्लॉग में आया... शायद कुछ कोशिश करता..वैसे मदरसों में इस तरह की तालीम कोइ नई बात नहीं है... मेरी खुद की प्राइमरी की तालीम मदरसे में हुई जहाँ मैंने हिंदी और संस्कृत सीखी और वन्देमातरम गाने पर कभी नहीं रोका गया... क्या मेरी देशभक्ति पर किसी को शक है..? हालंकि शक करने का किसी को अधिकार भी नहीं!!! documentary की सफलता के लिए मेरी शुभकामनायें

Meenu Khare said...

"क्या मेरी देशभक्ति पर किसी को शक है..? हालंकि शक करने का किसी को अधिकार भी नहीं!!!"


ऐसी बातों का औचित्य नही समझ में आया अनवार. आप जैसे समझदार और योग्य व्यक्ति जिसे अक्सर मैं "भारत का आदर्श युवा" कह कर बुलाती हूँ, के ऊपर ऐसी बातें करना शोभा नहीं देती.

हम सभी भारतीय हैं, भारत माँ की संतान यानी भारतवंशी आप अनवार भारतवंशी, मैं मीनू भारतवंशी.

Meenu Khare said...

@ पंकज सुबीर जी
ओह कितनी अच्छी रचना है!बिल्कुल वैसी जैसी मैं चाहती थी.लगा किसी ने मेरी ही भावनाओं को शब्दबद्ध कर दिया.

बेहतरीन रचना के लिए धन्यवाद. आपने मेरा मान रखा इस हेतु भी धन्यवाद.

@आदरणीय गिरीश पंकज जी और सुलभ जी की आभारी हूँ जिन्होने अपने क़ीमती वक्त इन शब्द रचनाओं को दिया.
--
मीनू खरे

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