उल्लास: मीनू खरे का ब्लॉग
एक ब्रॉडकास्टर की डायरी, जहाँ आपकी आहटों के मुंतज़िर हैं हम...
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Wednesday, December 30, 2009
स्पेलिंग-मिस्टेक
अहसास के डिक्टेशन में
फ़ेल किया गया उसे
तृप्ति की स्पेलिंग
ग़लत लिखने के कारण.
ग़लती उसकी नहीं
उसकी टीचर की थी--
ज़िन्दगी की वर्क-बुक में
प्रैक्टिस करवाई गई थी उसे
भूख लिखने की लगातार.
Sunday, August 09, 2009
अपराजिता
कल
जब मैं हार जाऊँगी
मैं जानती हूँ
कुछ नहीं होगा.
सब कुछ होगा
वैसा ही पुराना.
वही,
हार में जीत का अहसास ढूँढने की
मेरी आदतन कोशिश
वही निश्चिंतता,
वही मेरे सतत प्रयास
नए बिन्दुओं से नई शुरूआत के
"और निडर"
"और निर्भीक"
शायद अजेय बनने के...
शायद लोग भी क़ायल होंगे
उस नई जीत के नए मायनों के
पर,
यह बात तो मन में रहेगी ही
कि मैं हार गई
एक सच की लडाई.
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