
आज आपके लिए ले कर आई हूँ एक गीत. वास्तव में यह गीत, आजकल प्रत्येक शुक्रवार शाम 6:15 बजे, आकाशवाणी लखनऊ से प्रसारित हो रहे रेडियो धारावाहिक, "सिफ़र का सफ़र" का शीर्षक गीत है. यह नाट्य-धारावाहिक उन महिलाओं के जीवन की सच्ची घटनाओं पर आधारित है जिन्होने शून्य से शुरुआत कर शिखर तक पहुँचने में सफलता प्राप्त की और महिला सशक्तीकरण की अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की. इस धारावाहिक को बनाने का अनुभव बहुत रोमांचकारी रहा. दुर्गम गाँवों की ऐसी-ऐसी महिलाओं से मिलने और उन्हें जानने का मौक़ा इसको बनाने के बहाने मिला, जो भले ही पढी-लिखी नही पर निसंकोच स्वीकारती हूँ कि उनकी हिम्मत और मेहनत की कहानी सुन कर कई बार मैंने अपने आपको छोटा मह्सूस किया. आपको उन महिलाओं से मिलवाऊँगी, आगे इसी ब्लॉग पर. आज प्रस्तुत है "सिफ़र का सफ़र" का शीर्षक-गीत. आपकी सुविधा के लिए गीत के साथ इसका ऑडियो भी प्रस्तुत है. इसका संगीत तैयार किया है हेम सिंह ने और गायन स्वर संगीता मिश्रा का है. पढिए, सुनिए यह गीत. कोशिश की है कि गीत के माध्यम से इन महिलाओं का जीवन अभिव्यक्त कर सकूँ. गीत आपको कैसा लगा, यह जानने का इंतज़ार रहेगा.
सिफ़र के सफ़र में, अँधेरों की स्याही
कहानी ये किसने लिखी और सुनाई ?
मगर हमने सपना अलग इक सजाया
किरनों को जोड़ा और सूरज उगाया,
सतरंगी चूनरिया पंख बने अरमान
हौसलों की हमने भरी एक उड़ान,
बूँद-बूँद रौशनी से जगमग जहान
आँगन में दुनिया आँचल में आसमान.
(गीत सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें)