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Wednesday, July 12, 2017

अमरनाथ हमला: कुछ हाइकु






(1)
 ट्रिगर दबे
हरे से लाल हुआ
फिर सावन।

(2)

किसने किया?
रक्त से अभिषेक
आशुतोष का.

(3)

खूनी बौछार
पानी पानी हो गई
कश्मीरियत.
(4)

चारो दिशाएँ
लाल हुई हे! शिव
त्रिनेत्र खोलो.

(5)

हमारी माँग
माफ़ नहीं साफ़ हों
अब आतंकी।

Monday, September 12, 2011

चलो लिख डालें एक कविता





बहुत दिनों बाद मन है –

चलो लिख डालें एक कविता.

चलो लिख कर देखें

ढेर सारे सपने

सजाता है जिन्हें रोज मन

नींद आने के बस तुरंत बाद..

चलो पिरो दे पंक्तियों में

उन सारी पीडाओं को

व्यथाओं को

जो मन पर बोझ बन कर रहती हैं

और आत्मा जिन्हें न चाहते हुए भी सहती है...

चलो शब्द दे दें

भगवान से अपनी शिकायतों को...

चलो कह दें जग से

वो शिकवे

जो हैं हमें हँथेली की रेखाओं से...

चलो रचें वो सारे वाक्य

सुनना चाहते है जिन्हें कान

देखना चाहती है जिन्हें आँखे

अपने आगे सच होते हुए...

चलो उठाओ कलम और लिख डालो

या

रखो उँगलियाँ की-बोर्ड पर

और

छाप डालो वो सब कुछ

जो असल जिन्दगी में न सही

मगर कविता में तो जरूर हो सकता है सच.

Monday, July 04, 2011

एक अच्छी सी खबर

हाल में ही एक अच्छी सी खबर मिली सोचा आप सबसे शेयर करूँ.यह खबर दैनिक हिन्दुस्तान,लखनऊ से एक जुलाई को प्रकाशित हुई थी.



Tuesday, January 04, 2011

Who says Maths is easy?


[Courtesy: Funzu.com]



साथियों यह पोस्ट मेरी नही है ना ही मैंने यह अपने ब्लॉग पर लगाई है.अभी अभी मेल बॉक्स में आप लोगों के कमेंट्स देखा तो इस पोस्ट के बारे में पता चला.मैंने सोचा की हैकिंग का कोई चक्कर हो गया है.पर तभी मेरी फ्रेंड का बेटा जो मेरे घर आया था, लगातार हँसने लगा.काफी पूछताछ के बाद पता चला की यह हरकत उन महाशय की है.मेरा लैपटॉप ऑन देख कर उन्हें एक पोस्ट पब्लिश करने की सूझी और मेरे हिंदी ब्लॉग पर उन्होंने यह अंग्रेजी पोस्ट छाप दी.गुस्सा भी आया .मेरी फ्रेंड बहुत नाराज़ भी हुई उस पर.पर बेटा इतनी मासूमियत से सब सुनता रहा फिर बोला मुझे मैथ्स अच्छी नही लगती इसीसे मैंने यह किया. मुझे बहुत तरस आई.सोचा की पोस्ट डिलीट कर दूँ पर फिर लगा की एक बच्चा मैथ्स से इस कदर डरता है तो यह हम सब अभिभावक और शिक्षकों के सोचने का विषय है जिस पर हमारा चिंतन और कार्यवाही वांछित है.मैं बच्चे द्वारा पब्लिश इस पोस्ट को डिलीट नही कर रही.आप सबके कमेंट्स का इंतज़ार रहेगा....

Thursday, April 08, 2010

मशीनी ज़िन्दगी


दिन-रात
दौड़ती भागती
मेरी मशीनी ज़िन्दगी में,
मोबिल ऑयल हो तुम !
बेहद ज़रूरी,
नितांत आवश्यक.

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