Showing posts with label मन. Show all posts
Showing posts with label मन. Show all posts

Sunday, February 14, 2010

प्यार का वायरस





(वैलेंटाइन-डे पर विशेष)


तुम्हारे प्यार के वायरस
के अटैक से
सुनहला ज़ुकाम हो गया है
मेरे मन को


और

बार-बार आने वाली
मेरी छींकों की आवाज़ से
गूँजने लगी है दुनिया
सच कहते है न
प्यार छुपाए नहीं छुपता!!!

Wednesday, September 30, 2009

सोशल- एडजस्टमेंट/सोशल इंजीनियरिंग

प्लास्टिक के टुकड़े की तरह

चिटक-चिटक जाती हैं

मन की कोमल भावनाएँ

और बार-बार

विवशता का फ़ेवीकोल लगा कर

जोड़ा जाता है मन...

सोशल एडजस्टमेंट इसी को तो कहते हैं !

Tuesday, August 18, 2009

सावन

जब जब भी

बेतरह बरसती हैं

मेरी आँखें ,

बेहद हैरानी होती है

कि

मन के किसी कोने में

अब भी सावन बसता है.


और

जब जब भी

बेतरह बरसती हैं

मेरी आँखें ,

बेहद खुशी भी होती है

कि

मन के किसी कोने में

अब भी सावन बसता है .

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails