(अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष)
बचपन से सुना था
माँ के मुँह से
कि
यह घर मेरा नहीं है
जब मैं बड़ी हो जाऊँगी
तो मुझे
शादी होकर जाना है
अपने घर.
शादी के बाद
ससुराल में सुना करती हूँ
जब तब...
अपने घर से क्या लेकर आई है
जो यहाँ राज करेगी?
यह तेरा घर नही है,
जो अपनी चलाना चाहती है...
यहाँ वही होगा जो हम चाहेंगे,
यह हमारा घर है, हमारा !
कुछ समझी?