आज जहाँ देश में चारो ओर वन्दे मातरम सम्बन्धी विवाद चर्चा में है वहीं बनारस की मुस्लिम महिलाओं के प्रसिद्ध संगठन "मुस्लिम महिला फ़्रंट" ने गत 9 नवम्बर को वन्दे मातरम के विरोधियों को कड़ी चुनौती देते हुए "वन्दे मातरम सम्मान मार्च" निकाल कर उदघोष किया कि मुल्क पहले है और धर्म बाद में. सड़्क पर पर्दानशीं, हाथों में तिरंगा और ज़ुबान से निकलते वन्दे मातरम के सतत स्वर...कट्टरपंथियों के लिए यह करारा जवाब था, बनारस शहर की तमाम मुस्लिम महिलाओं की ओर से. ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरी बुर्क़ानशीनों ने शहर के शास्त्री पार्क,सिगरा से मलदहिया चौराहे तक यह मार्च "विशाल भारत संस्थान" के तत्त्वाधान में निकाल कर कहा कि राष्ट्र गीत का अपमान करने वाले देशद्रोही हैं और यह अपराध किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नही किया जाएगा. फ्रंट की नायब सदर नजमा परवीन ने कहा कि इस्लाम राष्ट्रभक्ति का हुक्म देता है अत: सभी मुसलमानों को इस मुद्दे पर आगे आकर धर्म के ठेकेदारों को मुँहतोड़ जवाब देना चाहिए.मुस्लिम महिला फ़्रंट की सचिव शबाना ने कहा कि धर्म की आड़ लेकर कट्टरपंथी नफ़रत फैलाना चाहते हैं ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए.उन्होने सरकार से मामले में तुरंत हस्तक्षेप की माँग भी की.
महिलाओं ने पोस्टरों के माध्यम से वन्दे मातरम को राष्ट्र्गीत का दर्जा मिलने तक का पूरा इतिहास देश के सामने रखा. पोस्टरों पर हिन्दी के साथ-साथ उर्दू में भी वन्दे मातरम लिखा था. पोस्टरों के ज़रिए बताया गया कि 1896 में मौलाना रहीमतुल्ला ने कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में वन्दे मातरम गाकर इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाई. 1905 में बनारस के कांग्रेस अधिवेशन में गोखले ने वन्दे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया. 1913 में करांची अधिवेशन में सदर मोहम्मद बहादुर ने वन्दे मातरम गाया. 1923 में मौलाना मोहम्मद अली,1927 में डॉ.एम.ए.अंसारी,1940-45 मे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने देश को वन्दे मातरम की शपथ दिलाई.
महिलाओं का कहना था कि वन्दे मातरम आज़ादी की लड़ाई का मूल मंत्र था. जब आज़ादी के दौरान इतने बड़े नेताओं ने सहर्ष वन्दे मातरम गाया तो आज यह विरोध क्यों? अशफ़ाक़उल्ला खाँ, मौलाना आज़ाद और डॉ.अंसारी जैसे देशभक्तों ने वन्दे मातरम कह कर देश के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया. हम इन देशभक्तों की क़ुर्बानी को ज़ाया नही होने देंगे और देश की एकता के लिए लगातार संघर्ष करेंगे.वतन के लिए जीना हमारा मकसद है और वतन की शान में कोई गुस्ताखी हम बरदाश्त नहीं करेंगे.
जयहिन्द हो या वन्दे मातरम
कहेंगे ज़रूर चाहे निकल जाए दम.