

आज स्वाधीनता दिवस है. मेरा आज का दिन विधान सभा समारोह की कवरेज और उसकी रेडियो-रिपोर्ट बनाने में बीतता रहा हैं. पूरी कवरेज टीम की पसीनाबहाऊ सरगर्मियों का बैकग्राउंड समेटे यह रिपोर्ट खासी थकाने वाली होती है. आज कई वर्षों बाद मेरी ड्यूटी कवरेज में नही लगाई गई है. यानी आज के दिन मैं फ़्री ! परिवारजन कई वर्षों बाद आज इस तरह खुश दिखे.स्वतंत्रता दिवस के दिन मेरा भी स्वतंत्र होना सबके लिए सुखद आश्चर्य है.
सुबह ऑफ़िस के ध्वजारोहण समारोह के बाद से समझ में नही आ रहा क्या करूँ. घरवालों के डर से यह कहने की हिम्मत नही है कि आज की छुट्टी बेरंग लग रही है. कैसे उन्हे बताऊँ कि आज के दिन की रेडियो रिपोर्ट मुझ जैसी साधारण ब्रॉड्कास्टर के लिए, मेरी तरफ़ से एक छोटी सी पुष्पाँजलि होती है भारत माँ के चरणों में ... पर कौन सुनेगा मेरी? हमेशा आप ही की ड्यूटी क्यों लग जाती है ऐसे कामों में? सरकारी नौकरी में ज़्यादा काम करने से तनख्वाह बढ् के नही मिल जाएगी. ..घर वालों की वही पुरानी दलीलें...पर फिर भी मन विचलित है.
एकाएक याद आ जाती है मई 2009 की 19 तारीख. ईरान की राजधानी तेहरान में आयोजित 10वें अंतर्राष्ट्रीय रेडियो फ़ेस्टिवल का अंतिम दिन. विश्व के 42 देशों से आए रेडियो कार्यक्रमों का कम्पटीशन जिसमें 121 फाइनल प्रविष्टियाँ है और जिसका रिज़ल्ट आज आउट होना हैं.एक वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व मेरे ज़िम्मे है. मैं बहुत नर्वस हूँ. पता नही क्या रिज़ल्ट होगा. अपने देश के लिए आज पूरी दुनिया के सामने सम्मान अर्जित कर पाऊँगी या खाली हाथ देश वापस लौटूँगी? मन कर रहा है किसी मन्दिर जाकर मनौती मान आऊँ, पर इस देश में आस पास कोई मन्दिर नही दीखता ..
शाम हो गई है.समारोह में भाग लेने के लिए मैं उस विराट हॉल में प्रवेश कर रही हूँ. दुनिया के 42 देशों के ध्वज कतार से लगे हैं. अपने तिरंगे के सामने मै ठिठक कर खडी हो जाती हूँ ,सबकी नज़र बचा कर, धीरे से तिरंगे को छू कर, भारत माँ से प्रार्थना करती हूँ " अगर आज भारत को शील्ड मिल जाती है तो लौटते में, मैं इसी तिरंगे के साथ फोटो खिचवाऊँगी."
भारत माँ ने मेरी प्रार्थना सुन ली है. मै शील्ड लेकर फोटो खिंचवा रही हूँ और भावुक स्वर में गा रही हूँ वन्दे मातरम!.
वन्दे मातरम! सुजलाम सुफलाम मलयज शीतलाम शस्य श्यामलाम मातरम! शु्भ्र ज्योत्सना पुलकित यामिनीम फुल्ल कुसुमितद्रुमदल शोभणीम. सुहासिनीम सुमधुर भाषणीम. सुखदाम् वरदाम् मातरम्. वन्दे मातरम!