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Thursday, July 29, 2010

मॉनसून






कल तक नम थीं सिर्फ आँखें
आज दिल भी नम है.
कोई मॉनसून आ पहुंचा है मुझ तक
शायद तुम से टकराने के बाद ....

Thursday, August 27, 2009

जूती

औरत-

पैर की जूती ही सही

मगर

क्या यह भी ध्यान है (?)

कि

जूती के काट लेने से

ज़ख्मी हो जाएगा

तुम्हारा पैर

और

लँगडा कर चलने पर मजबूर हो जाओगे तुम

उसी महफ़िल में

जहाँ

औरत को पैर की जूती कहने की शेखी बघार रहे हो तुम?

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